
नमस्कार आप देख रहे हैं दोस्तों पिछले 3 दिनों में बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने जो खेल खेला है वह देखने लायक है। बाहर कुछ और अंदर कुछ और। कैमरे के सामने भारत विरोध का नाटक लेकिन पर्दे के पीछे भारत से हाथ जोड़कर भीख मांगना। असली सवाल यह नहीं है कि यू टर्न हुआ। असली सवाल तो यह है कि यह यू टर्न करवाया किसने? जब अमेरिका और फ्रांस ने एक साथ मिलकर बांग्लादेश को घेरा तब यूनुस सरकार के पास सिर्फ एक ही रास्ता बचा था और वह रास्ता था भारत की शरण में जाना। दोस्तों पुराने बुजुर्ग लोग बिल्कुल सही कहते हैं कि जब जेब खाली होती है तो जुबान बहुत ज्यादा चलती है। लेकिन जब असली में भूख लगती है तो सारी अकड़ खुद ब खुद निकल जाती है। आज बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार की दयनीय हालत देखकर यह कहावत एकदम सटीक बैठती है। जो सरकार कल तक भारत को आंखें दिखा रही थी, धमकियां दे रही थी, अचानक उसके सुर इतनी तेजी से क्यों बदल गए? आखिर क्या मजबूरी है कि यूनुस सरकार अब भारत की शरण में आती दिखाई दे रही है? तो आइए पूरी खबर को विस्तार से समझते हैं। लेकिन उससे पहले अगर आप चाहते हैं कि भारत की आवाज पूरी दुनिया तक पहुंचे और हमारा देश हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने तो इस वीडियो ��ो लाइक करें और सब्सक्राइब बटन दबाकर इस चैनल को सब्सक्राइब करें। दोस्तों, इस पूरे जियोपॉलिटिकल ड्रामे में अब फ्रांस की भी जबरदस्त एंट्री हो चुकी है। फ्रांस ने सीधे तौर पर यूनुस सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लेकिन सबसे बड़ा ट्विस्ट तो उस्मान हादी की पूरी कहानी में आया है। वही उस्मान हादी जिसकी मौत के नाम पर बांग्लादेश में इतना भयंकर बवाल काटा गया। अब उसके अपने सगे भाई ने कैमरे पर आकर ऐसा विस्फोटक खुलासा किया है कि यूनुस सरकार की नींव ही हिल गई है। भारत के खिलाफ रचा गया एक बड़ा प्लॉट अब उन्हीं के गले की फांस बन गया है। पिछले दो-तीन दिनों में बांग्लादेश के अंदर भारत के खिलाफ नफरत का एक नया बाजार सजाया गया था। जरा स्क्रीन पर दिख रहे इस वीडियो को गौर से देखिए। यह महाशय बांग्लादेश की आम जनता के सामने खड़े होकर बेशर्मी से कश्मीर का मुद्दा उछाल रहे हैं। यह सपने देख रहे हैं कि बांग्लादेश की सरजमी से बैठकर यह कश्मीर को आजाद करवाएंगे। इनकी भाषा और तेवर देखकर आपको पाकिस्तानी तालिबान की याद आ जाएगी। सिर्फ इतना ही नहीं एक और चौंकाने वाला वीडियो देखिए। यहां एक अलग ही स्क्रिप्ट चल रही है। इसमें धमकी दी जा रही है कि अगर भारत ने बांग्लादेश पर कुछ भी किया तो पाकिस्तान तुरंत भारत पर हमला कर देगा। जरा इस हास्यास्पद बयान को सुनिए। यह जनाब दावा कर रहे हैं कि पाकिस्तान और बांग्लादेश साथ-साथ खड़े हैं। यह उस्मान हादी को शहीद बता रहे हैं और भारत को खुलेआम दुश्मन की तरह पेश कर रहे हैं। ऐसा माहौल बनाया जा रहा था कि अब तो भारत बांग्लादेश के बीच जंग होकर ही रहेगी। शायद इनका पूरा प्लान यही था कि भारत को उकसाया जाए और किसी लंबे युद्ध में उलझा दिया जाए। लेकिन दोस्तों, यह खतरनाक खेल तब पूरी तरह फेल हो गया जब दुनिया की बड़ी ताकतों ने सीधा दखल दिया। एक आधिकारिक लेटर जो अमेरिका के कांग्रेस सदस्यों ने भेजा है, इसमें यूनुस सरकार को साफ-साफ चेतावनी दी गई है। अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर ध्यान दीजिए और जल्द निष्पक्ष चुनाव कराइए। अमेरिका ने यह भी कह दिया कि अगर निष्पक्ष चुनाव चाहिए तो आवामी लीग से बैन हटाना पड़ेगा। यहां पूरा खेल देखिए। खालिदा जिया अस्पताल में बीमार पड़ी हैं। आवामी लीग पर बैन है और जमात को खुली छूट है। यह कैसा लोकतंत्र है? यह सवाल अब दुनिया को खटकने लगा है। इसके साथ ही बांग्लादेश में मीडिया के दफ्तर जलाए जाने पर फ्रांस भी भड़क गया। फ्रांस की एंबेसी ने तस्वीरें पोस्ट करते हुए कहा कि फ्री स्पीच के साथ ऐसा बर्बर सुलूक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब यूनुस सरकार चारों तरफ से घिर चुकी है। दबाव इतना भारी है कि जो सरकार कल तक चुप थी अब वही अपने मंत्रियों को पीड़ितों के घर भेज रही है और सोशल मीडिया पर सफाई दे रही है। लेकिन दोस्तों इस पूरी नाटकीय पिक्चर का असली क्लाइमेक्स अब आता है। जिस उस्मान हादी की मौत का झूठा आरोप भारत पर मढ़ने की घिनौनी कोशिश की गई थी। उसके अपने सगे भाई ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सच्चाई सबके सामने रख दी। दरअसल दोस्तों बांग्लादेश से एक विस्फोटक खबर सामने आई है। एक विश्वसनीय रिपोर्ट्स के मुताबिक उस्मान हादी का सगा भाई सीधे यूनुस सरकार की आंखों में आंखें डालकर कह रहा है यह हत्या तुमने करवाई है। मेरा भाई चाहता था कि देश में जल्दी लोकतांत्रिक चुनाव हो। लेकिन तुम चुनाव नहीं चाहते इसलिए उसे रास्ते से हटा दिया। उसने यूनुस सरकार को यह भी कड़ी चेतावनी दे डाली कि अगर जल्द निष्पक्ष चुनाव नहीं करवाए तो तुम्हारा हाल भी शेख हसीना जैसा होगा। यह भारत की कोई साजिश नहीं बल्कि बांग्लादेश की अपनी आंतरिक राजनीति का खतरनाक खेल है जो अब पूरी दुनिया के सामने उजागर हो चुका है। वियना की जांच रिपोर्ट भी यही स्पष्ट इशारा कर रही है कि उस्मान हादी की संदिग्ध मौत की असली जिम्मेदार वहां की कट्टरपंथी जमात ए इस्लामी है। इतनी बड़ी फजीहत के बाद अब आते हैं उस ताजा खबर पर जहां यूनुस सरकार ने शानदार यू टर्न मारा है। कल तक भारत को आंख दिखाने वाली सरकार अब भोलेपन से कह रही है। भैया हम तो दोस्त हैं। हम रिश्ते खराब नहीं करना चाहते। जानते हैं यह अचानक प्यार क्यों उमड़ आया? इसकी वजह बिल्कुल सीधी और आर्थिक है। क्योंकि भूखे पेट भजन नहीं होता। बांग्लादेश को तुरंत बड़ी मात्रा में चावल चाहिए। चावल तो पाकिस्तान भी दे रहा था। फिर अचानक भारत की याद क्यों आई? जवाब एकदम सीधा है पैसा बचत। यूनुस सरकार का कहना है कि हमें 5 लाख टन चावल की सख्त जरूरत है और हमें व्यापारिक संबंध जारी रखना है। असलियत यह है कि पाकिस्तान से चावल खरीदना उन्हें बहुत महंगा पड़ रहा है। गणित साफ है। भारत का रेट मात्र 355 प्रति टन डॉलर है। पाकिस्तान का रेट 395 प्रति टन डॉलर यानी भारत से खरीदने पर उन्हें हर टन पर पूरे $40 की सीधी बचत हो रही है। कुल $5 लाख टन की खरीद पर यह बचत करीब $20 मिलियन यानी $2 करोड़ डॉलर की है। अगर भारतीय रुपयों में देखें तो यह फायदा लगभग 168 करोड़ का बैठता है। तो देखा आपने जब बात पेट की आई तो सारी हेकड़ी निकल गई। जो सरकार रोज भारत के खिलाफ जहरीला माहौल बना रही थी। अब वही ₹18 करोड़ बचाने के लिए भारत से हाथ जोड़कर चावल मांग रही है। अगर हम थोड़ा पीछे मुड़कर देखें तो यह पहली बार नहीं है। बांग्लादेश के अंदर कुछ कट्टरपंथी लीडर्स लगातार सेवन सिस्टर्स यानी हमारे नॉर्थ ईस्ट के सात राज्यों को भारत से अलग करने की धमकी देते रहे हैं। उनका बेशर्मी से कहना है कि अगर भारत ने उनकी बात नहीं मानी तो वह नॉर्थ ईस्ट में विद्रोह भड़का देंगे। यहां तक कि खुद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस भी ग्रेटर बांग्लादेश का विस्तारवादी नक्शा लेकर चीन के दरवाजे पर जा चुके हैं। यह कहते हुए कि भारत के नॉर्थ ईस्ट राज्य भौगोलिक रूप से पूरी तरह बांग्लादेश पर निर्भर हैं। इसीलिए चीन को वहां सैन्य और आर्थिक दखल देना चाहिए। इसी खतरनाक तर्क के साथ उन्होंने चीन को खुला न्योता दिया। आइए हमारे यहां निवेश कीजिए। अब सवाल साफ है यह सारे भड़काऊ बयान, यह वीडियो, यह विस्तारवादी मैप और यह चीन को निमंत्रण आखिर क्या इशारा करते हैं? अब जरा रुकिए दोस्तों और सबसे जरूरी सवाल पूछिए। इस पूरे खतरनाक माहौल में भारत क्या कर रहा है? जब बांग्लादेश की सड़कों पर खुलेआम भारत के खिलाफ नफरत भरे नारे लग रहे हैं। कश्मीर पर बेतुकी बयानबाजी हो रही है और एंटी इंडिया नैरेटिव अपने चरम पर है। तब भी भारत बांग्लादेश की मानवीय मदद कर रहा है। आज ही की ताजा खबर देख लीजिए। एक बहुत बड़ी विडंबना सामने आई है। एक तरफ वह हमारे खिलाफ साजिशें रच रहे हैं। बांग्लादेश में प्याज के दाम आसमान छू रहे थे। लेकिन भारत ने मानवीयता दिखाते हुए बांग्लादेश को 210 टन प्याज आज ही भेज दिया है ताकि वहां के आम लोगों को महंगाई से राहत मिल सके। सिर्फ प्याज ही नहीं बांग्लादेश दुनिया में कपड़ों का बहुत बड़ा निर्यातक है। लेकिन उसे कच्चा माल, कॉटन, रुई देता कौन है? भारत। उनके घरों में जलने वाली बिजली, उनकी फैक्ट्रियों को चलाने वाली गैस भी भारत से ही जाती है। 2017 के बाद से अब तक भारत ने वहां करीब $8 बिलियन का निवेश किया है और $5 बिलियन का कर्ज दिया है। यानी साफ शब्दों में कहें तो वह हमारे पैसों पर हमारे संसाधनों पर पल रहे हैं और बदले में हमें ही आंखें दिखा रहे हैं। अब गंभीर सवाल आता है कि आखिर बांग्लादेश ऐसा कर क्यों रहा है? दोस्तों, यह वही पुरानी किताब का वही घिसा पिटा पन्ना है जो पाकिस्तान और चीन दशकों से इस्तेमाल करते आए हैं। जब कमजोर सरकारें अपने देश को चलाने में, महंगाई रोकने में फेल हो जाती हैं, तब वह अपनी नाकामी छिपाने के लिए एक बाहरी दुश्मन खड़ा कर देती हैं। बांग्लादेश की यूनुस सरकार भी ठीक यही कर रही है। अपनी नाकामी छिपाने के लिए जनता को भारत का डर दिखा रही है। लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। इतिहास गवाह है और अभी हाल ही में रूसी एंबेसडर ने भी याद दिलाया कि 1971 में बांग्लादेश को बनाने वाला भारत ही था। आज भौगोलिक रूप से बांग्लादेश 94% भारत की जमीन से घिरा हुआ है। यानी बांग्लादेश को यह सच्चाई कभी भूलनी नहीं चाहिए। लेकिन दोस्तों इतना सब कुछ होने के बावजूद अगर आप जमीनी हकीकत देखेंगे तो बांग्लादेश आज भी भारत के खिलाफ खड़ा नजर आता है। अगर भारत सच में चाहे तो एक सख्त कदम उठाकर उनकी पूरी सप्लाई चेन रोक सकता है। जरा सोचिए अगर भारत सिर्फ अपना बॉर्डर सील कर दे तो वहां रोटी, कपड़ा और मकान के लाले पड़ जाएंगे। भारत हमेशा से एक जिम्मेदार पड़ोसी रहा है। हमने कभी अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल नहीं किया। लेकिन अब शायद वक्त आ गया है कि डिप्लोमेसी की भाषा को थोड़ा सख्त किया जाए। ठीक वैसे ही जैसे अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ अपनी आर्थिक ताकत का कठोर इस्तेमाल किया। भारत के पास भी वह पावर है वह लेवरेज है। अगर भारत ने अब भी कड़ा रुख नहीं अपनाया तो वहां हो रहे अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और भारत विरोधी एजेंडा और बढ़ता जाएगा। हमें पूरी दुनिया को यह दिखाना होगा कि भारत सिर्फ मदद करना ही नहीं जानता बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सख्त फैसले लेना भी जानता है। आपको क्या लगता है? क्या भारत को अब प्याज भेजना बंद करके आंखें दिखानी चाहिए? अपनी राय कमेंट्स में जरूर बताएं। तो दोस्तों, यह थी आज की पूरी खबर जो काफी रिसर्च और मेहनत के बाद आपके सामने रखा गया है। और दोस्तों, जाते-जाते एक छोटी सी हेल्प कर दीजिए। इस वीडियो को एक लाइक करके अपने दोस्तों तक शेयर करके हमारी मेहनत को सपोर्ट कर दीजिए। धन्यवाद।