सोना और चांदी रोज खबरों में है। रोज नया रिकॉर्ड बना रहा है और आज भी चांदी ने नया रिकॉर्ड बनाया है प्राइस में। 23700 के ऊपर गया है चांदी का भाव और गोल्ड का भाव 138676 के ऑल टाइम हाई तक पहुंचा। तो बेतहाशा तेजी का माहौल है।

सोना और चांदी रोज खबरों में है। रोज नया रिकॉर्ड बना रहा है और आज भी चांदी ने नया रिकॉर्ड बनाया है प्राइस में। 23700 के ऊपर गया है चांदी का भाव और गोल्ड का भाव 138676 के ऑल टाइम हाई तक पहुंचा। तो बेतहाशा तेजी का माहौल है — जबरदस्त तेजी है और यह तेजी थम नहीं रही है। $72 के ऊपर चला गया है चांदी का भाव जो कुछ ही महीने पहले तक एक कल्पना लगता था। अब वह हकीकत बन गई है और अब देखिए $72 के ऊपर चांदी का प्राइस चला गया है। बेतहाशा तेजी के बीच आज हम बात करने वाले हैं गोल्ड पर इन डेप्थ व्यू। प्राइस की बात तो हमने की ही है। आपको बताया यह है कि दाम क्यों बढ़े हैं? आगे के फंडामेंटल क्या है? लेकिन सवाल यह है कि क्या ग्लोबल मार्केट में मांग के मुकाबले गोल्ड की सप्लाई पर्याप्त है? क्या दाम बढ़ने से गोल्ड की माइनिंग बढ़ी है? उत्पादन बढ़ा है? इसी पर एक बेहद खास इंटरव्यू हम करने जा रहे हैं और हमारे साथ इस वक्त जुड़ रहे हैं हनुमान प्रसाद मोदाली जो कि एमडी हैं डेक्कन गोल्ड माइंस के। सर बहुत स्वागत है आपका जी बिनेस पर और जिस वक्त मैं आपसे बात कर रहा हूं दुनिया भर में गोल्ड की चर्चा हो रही है सिल्वर की चर्चा हो रही है ऐतिहास हम सब हिस्ट्री को बनते हुए देख रहे हैं तो आपकि गोल्ड माइनिंग में हैं और आपसे बेहतर व्यू गोल्ड सप्लाई को लेकर प्रोडक्शन को लेकर और कौन दे सकता है? तो मेरा पहला सवाल सर आपसे यही होगा कि जिस वक्त मैं आपसे बात कर रहा हूं दुनिया भर में गोल्ड के दाम ऑल टाइम हाई पर हैं। क्या ऑल टाइम हाई पर दाम जाने के बाद ग्लोबली गोल्ड की माइनिंग कुछ बढ़ी है सर? अ फर्स्ट ऑफ ऑल थैंक यू वेरी मच फॉर हैविंग मी ऑन द शो। या गोल्ड का दाम तो देख ही रहे हैं। इट्स इट्स इंक्रीजिंग एंड वी आर होपिंग दैट यह भी और थोड़ा आगे इट विल गो अप आल्सो हम बट कमिंग टू द माइनिंग। माइनिंग में जो है कि यह तेजी जो प्राइस में जो आ रहा है उसको मैच करने के लिए उतना माइनिंग नहीं हो रहा है। होना भी इतना इजी नहीं है क्योंकि एक डिपॉजिट को डिस्कवर करना उसको माइनिंग तक ले आने में बहुत टाइम लगता है। जैसा कि हमने इंडिया में जो किया है वो इट टूक ऑलमोस्ट लाइक 10 इयर्स फॉर अस टू कम टू द माइनिंग स्टेट। तो मेरा कहना ये है कि वो एक प्रोजेक्ट को माइनिंग करके उससे प्रोडक्शन करना इट इज अ लॉन्ग टाइम एस्पेक्ट है और ये प्राइस से जो ऊपर जा रहा है इमीडिएटली प्रोडक्शन इंक्रीस करना भी इतना इजी नहीं है। तो इट ऑलवेज थोड़ा पीछे ही रह जाएगा द प्रोडक्शन ऑफ द गोल्ड इन टर्म्स ऑफ़ द इंक्रीजिंग द प्राइसेस। ओके। ठीक है। अब मेरा दूसरा सवाल सर आपसे ये होगा कि इंडिया में गोल्ड माइनिंग की सिचुएशन क्या है? हम कितना माइनिंग कर पा रहे हैं गोल्ड का और ग्लोबली कितना गोल्ड माइन हो रहा है पर ईयर? या या इंडिया में अनफॉर्चूनेटली वी आर द लार्जेस्ट वन ऑफ द लार्जेस्ट इंपोर्टर्स गोल्ड का ऑलमोस्ट 800 900 टन्स हम हर साल इंपोर्ट करते हैं। बट इंडिया में डोमेस्टिक प्रोडक्शन अभी तक इस साल तक एक ही माइन है इंडिया में वो कर्नाटक में हट्टी गोल्ड म उससे अबाउट वन टू वन एंड हाफ टन का गोल्ड आता है। तो इसका मतलब एंटायर गोल्ड प्रोडक्शन जो है गोल्ड रिक्वायरमेंट वो बाहर से ही आ रहा है। हम अभी-अभी इंडिया में हमारा जो माइन आंध्रा में जो खुला है उससे कमर्शियल प्रोडक्शन चालू हो गया। इट विल ऐड अनदर मे बी ए टन इन द नेक्स्ट वन और टू इयर्स बट इवन दैट इज नॉट जस्ट सफिशिएंट फॉर द रिक्वायरमेंट इन दिस कंट्री। हैविंग सेड दैट अब क्या हो रहा है? लॉट ऑफ़ कंपनीज़ एक्सप्लोरेशन कर रहा है। इंडिया में भी गवर्नमेंट भी लॉट ऑफ़ पुश दे रहे हैं। तो ताकि इंडिया में एक्सप्लोरेशन हो और डिपॉजिट्स ढूंढे और उसको माइनिंग में लेके जाए। बट प्रॉब्लम वही रहेगा कि एक साथ नेक्स्ट ईयर आप इनक्रीस नहीं कर सकते क्योंकि डिस्कवरी होना है, कंस्ट्रक्शन होना है। राइट? तो थोड़ा वो दैट इज द सिचुएशन। इट्स नॉट वै ग्रेट बट वी आर इंप्रूविंग। राइट? अब सर ग्लोबल माइनिंग का सिचुएशन क्या है? और जितनी डिमांड है ग्लोबली मैं फ्रेश गोल्ड की बात कर रहा हूं। रिसाइकल की बात हम बाद में करेंगे। लेकिन जो ग्लोबल डिमांड है गोल्ड की उसके मुकाबले हम कितनी माइनिंग कर पा रहे हैं ग्लोबली? इस ग्लोबल डिमांड इसमें क्या होता है? जनरली अराउंड 4000 टन्स ऑफ गोल्ड एवरी ईयर माइनिंग हो रहा है दुनिया में एंड लार्जेस्ट प्रोड्यूसिंग नेशंस आर लाइक रशिया एंड चाइना दे आर लीडिंग। उसके बाद ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका, कनाडा आता है। हम तो ये 4000 टन्स जो है वो अभी तक जो डिमांड है उसे पूरा नहीं कर पा रहा है। एंड ऑफ़ कोर्स देयर इज़ आल्सो सम अमाउंट ऑफ़ इललीगल गोल्ड दैट गोज़ अराउंड। बट दी जो भी गोल्ड प्रोडक्शन हो रहा है वह डिमांड से मैच नहीं हो रहा है। देयर इज ए डेफिशिएंसी इन द सप्लाई एस फ एस अ डिमांड इज कंसर्न। हम परफेक्ट। ओके। अब मैं आता हूं एक दूसरे सवाल पे। जैसे आपने कहा कि माइनिंग कम है। उसके मुकाबले डिमांड ज्यादा है। तो सर आप जरा बताइए कि इस वक्त जब गोल्ड के प्राइस $4500 के आसपास चला गया है ग्लोबल मार्केट में। माइनिंग की कॉस्ट क्या आती है सर गोल्ड की? जनरली ये पूरा जो माइ है लास्ट 10 इयर्स में जो इसको बोलते हैं ऑल इन सस्टेनिंग कॉस्ट जो इंक्लूडिंग माइनिंग प्रोसेसिंग एवरीथिंग इंक्लूडेड तो ये अराउंड $1000 पे ही रहा था। हम हम तो जब $2000 का प्राइस था गोल्ड का $120 $150 से काम चल रहा है। बट अभी अब आके जब गोल्ड प्राइस एकदम 450 $500 हो गया हम द कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन उतना ही रह गया। आई मीन मे बी इट इंक्रीस अनदर $ और सो 1150 $200 हुआ है अभी तक बट दी माइनिंग एंड ऑपरेटिंग कॉस्ट इतना इंक्रीस हुआ नहीं है। राइट? सो दी एज अ रिजल्ट माइनर्स आर रीपिंग अ लॉट ऑफ़ बेनिफिट आउट ऑफ़ दिस। मैं एक्चुअली एक एक स्माल एग्जांपल देता हूं। व्हेन वी स्टार्टेड आवर ऑपरेशंस जब हमने फिजिबिलिटी स्टडी किया था इंडिया में। राइट। हम यह सोच रहे थे कि आवर फिजिबिलिटी स्टडी वास डन बेस्ड ऑन ₹000 पर ग्राम गोल्ड प्राइस। सो जब प्रोडक्शन में आया आई थिंक द ऑपरेटिंग कॉस्ट इज़ मोर और लेस एट द सेम बट द सेलिंग कॉस्ट इज़ क्वाइट हाई। ये ये बहुत बढ़िया बताया आपने। जो दर्शक हमें देख रहे हैं इस बात को समझे कि जो गोल्ड की जो माइनिंग होती है, जो उत्पादन होता है गोल्ड का उसकी कॉस्टिंग आती है $200 के आसपास। उसके मुकाबले गोल्ड का प्राइस है $500। आप सोचिए कि जो लोग गोल्ड माइनिंग के बिजनेस में हैं दुनिया में वो किस तरह जैसे अभी सर ने बताया कि बहुत फायदे में हैं। उनको बहुत बेनिफिट हो रहा है क्योंकि कहां $200 की कॉस्टिंग है उनको मिल रहा है $4500 का भाव। तो करीब-करीब चार गुना के आसपास गोल्ड के दाम उनको ज्यादा मिल रहे हैं कंपेयर टू माइनिंग कॉस्ट। तो सर एक सवाल ऐसे में बनता है कि ग्लोबली और इंडिया में दोनों जगह के लिए मैं पूछ रहा हूं आपसे कि माइनिंग में कितना पोटेंशियल माइनिंग ग्रोथ मतलब बढ़ने की कितनी संभावना आपको दिख रही है? ग्लोबल मार्केट में भी और इंडिया में भी क्योंकि हम तो इंपोर्ट ही नेट इंपोर्टर हैं हम गोल्ड के तो हमारे यहां कितना पोटेंशियल है माइनिंग बढ़ने का और ग्लोबल मार्केट में गोल्ड की माइनिंग बढ़ने का कितना पोटेंशियल आपको दिख रहा है या मैं पहले आई थिंक इंडिया से स्टार्ट करता हूं एक्चुअली इंडिया में लास्ट 50 60 साल से जो एक्सप्लोरेशन इतना कम हुआ गोल्ड के लिए तो इंडिया एक तरफ से देखा जाए तो इट इज अनटप्ड पोटेंशियल है हम तो इंडिया में प्रोडक्शन इनक्रीस करने का बहुत चांसेस है। एटलीस्ट हम यहां से लेके अब मान लीजिए दो टन हम प्रोडक्शन कर रहे हैं। उससे वेरी इजीली वी कैन गो टू 30 40 टन्स एंड द नेक्स्ट 10 इयर्स अगर हम प्लान करेंगे तो ऑलमोस्ट 100 टन्स तक जा सकते हैं। क्योंकि हमारा पोटेंशियल अनटप रह गया है। देयर आर मेनी अदर प्लेसेस जैसा ऑस्ट्रेलिया में चलिए आप कनाडा एंड इवन मेनी लाइक साउथ अफ्रीका जहां बहुत सारा एक्सप्लेशन होता रहा पहले से तो वहां डिपॉजिट को डिस्कवर करना और प्रोडक्शन में लाना बहुत टाइम लगेगा बट इंडिया में क्योंकि वन टैप है उसको हम थोड़ा एफर्ट दे देंगे तो तुरंत यहां से प्रोडक्शन करने का चांसेस है। ओके आपने कहा कि 10 साल में आप 100 टन तक पहुंच जाएंगे जो अभी हम डेढ़ से दो टन पे हैं। सर या डिपेंडिंग ऑन ऑफ कोर्स इसका ये है कि पूरा एफर्ट्स लगाना पड़ेगा एक्सप्लोरेशन के लिए क्योंकि एक्सप्लोरेशन इज ए रिस्की गेम उसमें बहुत सारे एंटरप्रेन्यर्स आके अगर पैसा लगाएंगे तो आई एम श्योर बिकॉज़ जियोलॉजिकल पोटेंशियल है इंडिया में। बहुत जगह में इंडिया में गोल्ड मिलने का संभावना है। आजकल आप रिपोर्ट्स भी देखे होंगे देयर आर मेनी प्लेसेस वेयर गोल्ड इज देयर। एंड आई विल जस्ट गिव यू स्टैटिस्टिक्स। अभी तक दुनिया में अबाउट 1 लाख टन्स का गोल्ड प्रोडक्शन हुआ। 25000 टन इंडिया में ही है। अच्छा पूरा पूरा जितना भी प्रोडक्शन हो रहा है 1/4 ऑफ द गोल्ड ऑफ कोर्स इंडिया में इट इज़ वि इन द वि द पब्लिक नॉट वि द बैंक्स ऑफकोर्स बट इंडिया इज़ ऑलवेज फॉर द गोल्ड एंड ऑलवेज गेटिंग द गोल्ड फ्रॉम वेरियस प्लेसेस। इसका पहले भी इंडिया में प्रोडक्शन होता था। बट अनफॉर्चूनेटली लास्ट फ्यू डिकेड्स इट हैज़ कम डाउन। राइट। क्विकली सर एक लास्ट क्वेश्चन आपसे पूछ रहा हूं कि गोल्ड प्राइस पर एक माइनर्स का क्या व्यू है? क्या आपको लगता है कि गोल्ड के प्राइस थोड़े पैनिकिक ज़ोन में आ गए हैं, डेंजर ज़ोन में आ गए हैं या आपको लगता है कि ये बैक्ड बाय फुल्ली बैक्ड बाय फंडामेंटल है और ये तेजी कंटिन्यू रहेगी? आई थिंक माइनर्स का है। ऑब्वियसली वी वांट टू बी ऑप्टिमिस्टिक ऑन दिस। बट माइनर्स का भी माइनर्स का एक व्यू है कि इट कुड गो लिटिल बिट मोर फ्रॉम हियर। अभी मे बी इट कुड टच अराउंड $5000 और 4900 दैट इज़ व्हाट द जनरल फीलिंग इज़ एंड ऑब्वियसली इट इज़ बैक बाय बिकॉज़ मेनी पीपल आर नाउ डवर्सिफाइंग देयर इन्वेस्टमेंट्स इंटू द गोल्ड। सो दे दी प्राइस विल सस्टेन मे बी इट विल गो अप लिटिल बिट। सो माइनर्स आर आल्सो बैक बाय दैट। आप लोग हेज करते हैं क्या? माइनर्स हैेज करते हैं क्या गोल्ड? हैेज करते हैं बट एटलीस्ट वी आर नॉट इन दैट स्टेडियंट। ओके। ठीक है। बहुत शुक्रिया मुदाली जी आपका हमारे साथ जुड़ने के लिए और बहुत ही इन डेप्थ व्यू हमारे ऑडियंस को गोल्ड प्रोडक्शन गोल्ड माइनिंग के बारे में देने के लिए। आपका बहुत-बहुत शुक्रिया हमारे साथ जुड़ने के लिए।

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